Kedarnath Temple : उत्तराखंड देव भूमि या देवताओं की भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है। उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जो न केवल हिमालय की सुंदरता को समेटे हुए है, बल्कि यह एक खूबसूरत सांस्कृतिक सभ्यता को भी दर्शाता है। पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड राज्य पर्यटकों के लिए बहुत खास है पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आते हैं, खासकर गर्मियों का मौसम पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है। उन्हीं में से एक धार्मिक पर्यटन स्थल है केदारनाथ मंदिर। इस मंदिर को कब बनाया गया इसका कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन केदारनाथ हजारों वर्षों से प्रमुख तीर्थ स्थल में से एक है आइये हम इस हिन्दू धर्म के प्रमुख मंदिर के बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

kedarnath temple
केदारनाथ मंदिर

केदारनाथ मंदिर

केदारनाथ मंदिर भारतीय राज्य उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में  केदार नामक हिमालय पर स्थित है, जो देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग है। केदारनाथ धाम और मंदिर तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है।  यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा शिव मंदिर है, जिसे विशाल पत्थरों से जोड़कर बनाया गया है। मंदिर लगभग 6 फीट ऊंचे मंच पर बनाया गया है  इसका गर्भगृह बहुत ही प्राचीन है।

बाबा केदार का यह धाम कत्यूरी शैली में बना है। इसके निर्माण में बड़े भूरे पत्थरों का उपयोग किया गया है मंदिर की छत लकड़ी से बनी है। मंदिर के बाहरी दरवाजे पर  शिव की सबसे प्रिय नंदी की एक विशाल मूर्ति है। केदारनाथ मंदिर 85 फीट ऊंचा, 187 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा है। इसकी दीवारें 12 फीट मोटी और बेहद मजबूत पत्थरों से बनी हैं। मंदिर 6 फुट ऊंचे मंच पर खड़ा है। यह आश्चर्यजनक है कि इतनी भारी पत्थरों को इतनी ऊंचाई पर लाकर मंदिर को कैसे तराशा गया होगा। विशेष रूप से इस विशाल छत को खंभे पर कैसे रखा गया होगा। पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है इसी तकनीक के कारण मंदिर को नदी के बीच में रहने में सफल है।

केदारनाथ मंदिर का इतिहास

पुराणों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद, जब पांडव अपने ही भाइयों की हत्या से बहुत दुखी हुए, वे केदार की इस भूमि पर पश्चाताप करने आए, कहा जाता है कि यह मंदिर उनके द्वारा स्थापित किया गया था।

माना जाता है कि यह मंदिर 80 वीं शताब्दी का है। केदारनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है की इसे पांडव वंश के जनमेजय द्वारा बनाया गया था लेकिन कई मान्यताओं के अनुसार इसे आदिगुरू शंकराचार्य ने इसकी स्थापना की है। जैसा की हमने पहले बताया इस मंदिर को कब बनाया गया इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन केदारनाथ हजारों वर्षों से प्रमुख तीर्थ स्थल है ऐसा माना जाता है की केदारनाथ के दर्शन किये बैगर अगर बद्रीनाथ की यात्रा करें तो यात्रा निष्फल माना जाता है इसलिए अगर आप केदारनाथ जाते है तो बद्रीनाथ की यात्रा करना न भूलें।

लगभग 400 वर्षों से बर्फ में ढका बाबा केदारनाथ मंदिर कई विपरीत परिस्थियों को झेल चुका है फिर भी यह सीना ताने हुए भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है।

केदारनाथ मंदिर
केदारनाथ मंदिर का भव्य दृश्य

केदारनाथ मंदिर में दर्शन

मंदिर सुबह 6 बजे से खुल जाता है शिव-पिंड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराया जाता है और मक्खन लगाया जाता है धूप और दीप जलाकर आरती की जाती है। इस समय, तीर्थयात्री मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और पूजा कर सकते हैं, दोपहर 3 से 4 बजे तक विशेष पूजा करने के बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है और फिर मंदिर को शाम 5 बजे सार्वजनिक दर्शन के लिए फिर से खोल दिया जाता है। इसके बाद देर रात नियमित आरती होती है लेकिन रात को भक्त इसे केवल दूर से देख सकते हैं रात को आरती होने के पश्चात मंदिर को 8:30 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है। आप ऑनलाइन मंदिर में पूजा पाठ करवा सकते हैं इसके लिए आपको केदारनाथ बद्रीनाथ वेबसाइट में जा सकते हैं साथ ही यहाँ आपको पूजा पाठ से सम्बंधित कीमत के बारे में भी जान सकते हैं।

केदारनाथ मंदिर में होने वाले पूजा और उनकी कीमतें

मंदिर में कई तरह के पूजा अर्चना किया जाता है और भक्तों को पूजा में शामिल होने के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करना पड़ता है जिनके बारे में नीचे बताया गया है। सुबह 04 बजे से शाम 07 बजे तक होने वाली विभिन्न प्रकार के पूजा के नाम और निर्धारित राशि

  • महाभिषेक  – इस पूजा में भाग लेने की लागत INR 1700 प्रति व्यक्ति है।
  • रुद्राभिषेक  – पूजा भगवान शिव को समर्पित है और सभी पापों को मिटाने के लिए की जाती है। इस पूजा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति INR 1300 खर्च होता है।
  • लघुरुद्रभिषेक  – यह अभिषेक स्वास्थ्य और धन से संबंधित मुद्दों को हल करने या कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है। इस पूजा में एक व्यक्ति की लागत INR 1100 है।
  • षोडशोपचार पूजा – इस पूजा में शामिल होने के लिए प्रत्येक भक्त के लिए INR 1000 का भुगतान करना पड़ता है। इनके अलावा, बालभोग, सामान्य सुबह पूजा और कई अन्य अनुष्ठान भी किए जाते हैं, जिसमें आगंतुक नाममात्र दरों पर उपस्थित हो सकते हैं।

शाम 6:00 बजे से 07:30 बजे के बीच होने वाली पूजा के नाम और निर्धारित राशि निम्नलिखित है

  • शिव सहस्रनामम स्तोत्र  – इस पूजा में भगवान शिव के सामने सभी 1008 नामों का पाठ किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को इस पूजा में शामिल होने के लिए INR 360 का भुगतान करना होगा।
  • शिव महिम्स्तोत्र पाठ  – इस पूजा में भाग लेने के लिए भक्तों को INR 360 प्रति व्यक्ति देना पड़ता है। 
  • शिव थंडवस्तोत्र पाठ– जिन स्तोत्रों में प्रति स्तोत्र के 16 शब्द होते हैं, वे भगवान शिव की शक्ति और सुंदरता का वर्णन करते हैं। यह एक व्यक्ति के लिए INR 340 का खर्च करता है।

केदारनाथ मंदिर कब जाये?

मंदिर सर्दियों के छह महीनों बंद रहता है। इन छह महीनों के दौरान भगवान केदारनाथ उखीमठ में रहते हैं। जब केदारनाथ द्वार बंद हो जाते हैं, तो भगवान को पालकी से यहां लाया जाता है। इन 6 महीनों के दौरान भगवान भोलेनाथ जी के दर्शन उखीमठ में कर सकते हैं। अगर आप केदारनाथ जाने का मन बना रहें है तो आपको इस लेख में बताये गए बातों को ध्यान में रखना होगा। केदारनाथ की यात्रा के लिए मई से अक्टूबर का समय सबसे बढ़िया माना जाता है।

केदारनाथ धाम जाने वाले यात्रियों के लिए उपयोगी टिप्स

  • अपने पास गर्म कपड़े रखें क्योंकि सूरज ढलने के बाद तापमान काफी कम हो जाता है।
  • शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है। शराब लेकर न जाएँ
  • अपने साथ आपातकालीन दवाएं लें।
  • कच्चा और ठंडा खाना खाने से बचें। उबला या पकाया हुआ भोजन सुरक्षित होता है।
  • यात्रा करने के दौरान, उन स्थानों पर आराम न करें जहां चेतावनी के संकेत दिखाई देते हैं।
  • अपने आपको सनबर्न से बचने के लिए सनस्क्रीन क्रीम का उपयोग करें
  • केदारनाथ की यात्रा पर निकलने से पहले आपको एक मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। मेडिकल प्रमाणपत्र गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में प्राप्त कर सकते है।

केदारनाथ धाम कैसे पहुंचे

आप हरिद्वार या ऋषिकेश से केदारधाम की यात्रा कर सकते हैं  यहां से गौरीकुंड जाने में दो दिन लगते हैं। श्रीनगर या रुद्रप्रयाग में रात भर आराम करें और अगले दिन गौरीकुंड जाएं। सुबह 8 बजे गौरीकुंड से चढ़ाई शुरू करें  रात को केदारनाथ पहुंचें और रात केदारनाथ में रुकें।

गौरीकुंड से केदारनाथ के रास्ते में सुबह 11 बजे के बाद मौसम खराब हो जाता है, जो दोपहर 2 बजे से 3 बजे के आसपास तक रहता है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक का रास्ता पैदल है। यहां से आप पैदल, पालकी या घोड़े पर जा सकते हैं।

हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ धाम जाएँ

केदारनाथ धाम जाने के लिए हेलिकॉप्टर की भी सुविधा उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर सेवा फाटा और अगस्तामुनी हेलीपैड से नियमित अंतराल पर है। 5-सीटर हेलीकॉप्टर विभिन्न टूर कंपनियों द्वारा संचालित किए जाते हैं। हेलिकॉप्टर से यात्रा करने के लिए प्रति व्यक्ति INR 6500 तक खर्च करना पड़ता है।

  • निकटतम हवाई अड्डा : जॉलीग्रांट देहरादून का निकटतम हवाई अड्डा है।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन : ऋषिकेश रेलवे स्टेशन

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